चलते चलते आ गया ये कैसा रस्ता सामने/ग़ज़ल/प्रेमकिरण
चलते चलते आ गया ये कैसा रस्ता सामने दूर तक फैला हुआ है घुप् अंधेरा सामने सब सियासत ही के गंदे खेल में मसरूफ़ हैं डर रहा हूंं देख कर अंजामे-फ़र्दा सामने सहमे सहमे से हैं बच्चे हंसती गुड़िया देखकर कल धमाके में मरा था एक बच्चा सामने आंधियों का दौर है ये हर शजर […]
