चौंक के जाग उठा नींद में सोने वाला/ग़ज़ल/प्रेमकिरण
चौंक के जाग उठा नींद में सोने वाला जाने किस ख़्वाब में डूबा था बिछोने वाला कम से कम क़त्ल का मंज़र तो न देखा उसने जागने वालों से अच्छा रहा सोने वाला मां आंचल पे हैं बच्चों के लहू के छींटें कोई आंसू नहीं इस दाग़ को धोने वाला जाने किस दिल से सुनाता […]
