साहित्य की अद्भुत दुनिया

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साहित्य

ग़ज़ल

मैं इक फ़नकार हूँ, फ़न के नए लफ़्ज़ों में बोलूँगी/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

धरा तो बाँट लेंगे पर ख़ुशी क्या बाँट पाएँगे/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

इक दवा हो गई प्रेम की वो गली/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

ज़िंदगी से प्यार है तो युद्ध क्यों/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

रूह का शृंगार है उसने कहा था/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

जग में हिंदुस्तान का सम्मान वंदेमातरम/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

सुनहरे फूल के मानिंद हम भी मुस्कुराएँगे/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

ठेस लग जाती है दिल को/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

मेरे पास चले आना तुम/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

हो गई ख़ुद में फ़ना तो मैं ग़ज़ल कहने लगी/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

परायों से भी करता प्यार जो जी जान से बढ़कर/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

वो सतयुग की शैली, वो आचार दे दो, हमें राम पहले-सा, संसार दे दो/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

सुनो ऐ चाँद पूनम के/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

मुझसे अब तुम लाड़ लड़ाने मत आना/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

वो इक मसला ही सालों साल है जब/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

दीप बनकर हर घड़ी लड़ती रही/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

कभी तुम चाय पर आना/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

उड़ा रहा है ये कौन मुझको/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

वो अनपढ़ गाँव की लड़की/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

ग़ज़ल

धरोहर गाँव की हमको/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय

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