रत्नसेन-देवपाल-युद्ध-खंड-55 पद्मावत/जायसी
सुनि देवपाल राय कर चालू । राजहि कठिन परा हिय सालू ॥ दादुर कतहुँ कँवल कहँ पेखा । गादुर मुख न सूर कर देखा ॥ अपने रँग जस नाच मयूरू । तेहि सरि साध करै तमचूरू ॥ जों लगि आइ तुरुक गढ़ बाजा । तौ लगि धरि आनौं तौ राजा ॥ नींद न लीन्ह, रैनि […]
