गीत व्यंग्य लय गज़ल गयी/दिलजीत सिंह रील
कितने सारे यार गये । हमको जिन्दा मार गये ।। यार गये जां वार गये । सुख के सब आधार गये।। बसे हुए थे आंखों में । सपनों के संसार गये ।। डोरी थामें रिश्तों की । सारे रिश्ते हार गये ।। प्राणों के कोषालय से । जीवन के उपहार गये ।। वे सब महा […]
