धरोहर

कदम कदम पर धोखा/दिलजीत सिंह रील

गुप-चुप रोएं कब तक । पलक निचोएं कब तक।। आंसूं-आंसूं लिख कर । कलम भिगोएं कब तक।। गहरे दाग लगे हैं । दामन धोएं कब तक।। कदम कदम पर धोखा। निष्ठा बोएं कब तक ।। नफरत की आंधी‌ में। प्रेम बिलोएं कब तक।। हम-आप सियासत की। बदबू ढोएं कब तक।। वीर-बहादुर सैनिक । रण में […]

जब सपने गीले होते हैं/दिलजीत सिंह रील

दुखदर्द कटीले होते हैं। ये बहुत हठीले होते हैं।। इनसे बचना मुश्किल इनके। खूंखार कबीले होते हैं।। पलकों में ही घुट जाते हैं‌। जब सपने गीले होते हैं।। पैनेपन से कलम अंजी हो। तब व्यंग्य चुटीले होते हैं।। सांपों से तो बच जाओगे । आदम जहरीले होते है़।। उसके अधरों से जो झरते। संवाद नशीले […]

अब सारी दुनियां दुहराती है/दिलजीत सिंह रील

तू जाने तेरे दिल की बातें। या दिल जाने कातिल की बातें।। अब सारी दुनियां दुहराती है। तेरी मेरी महफिल की बातें।। बस बातें ही बातें हैं उसकी। जो कहता है कामिल की बातें।। अब धारा से ही बातें होंगीं । फिर क्या करना साहिल की बातें।। जब धर्म कर्म है चलते रहना । हास्यापद […]

शब्द अधर तक आए/दिलजीत सिंह रील

पलकों में बन्द हुए । आंसूं मकरन्द हुए ।। अलकावलि लहराई। दुख-घन आनन्द हुए।। बन्धन में रहकर भी। आप हम स्वछन्द हुए।। शब्द अधर तक आए। गीतों के छन्द हुए।। शिव कुटिया तक पहुंचे। वो परमानन्द हुए।। छोड़ेंगे बांह नहीं। मन बाजू-बन्द हुए।। संगीत सुधा बरसी। सुर ताल समुन्द हुए।। आंखों की पलकों पर। सपने […]

मौसम मन को भाया प्यारे/दिलजीत सिंह रील

मौसम मन को भाया प्यारे । लौट जमाना आया प्यारे।। कुत्ता गिरगिट मगरमच्छ का। क्या क्या रंग दिखाया प्यारे।। गा गा कर लोरी जनता को। गहरी नींद सुलाया प्यारे ।। देश भक्ति के दांत दिखा कर। देश दबा कर खाया प्यारे।। हम सारे देश विदेशों में। घूमें और घुमाया प्यारे।। हम रावण हैं दिल से […]

किंगकांग हो तुम गामा हो/दिलजीत सिंह रील

किंगकांग हो तुम गामा हो । आदमी नहीं पैजामा हो।। बच्चे भूखे रोटी दो ना । तुम कैसे चंदा मामा हो।। कोई कृष्ण नहीं कलयुग में । तुम भी तो कहां सुदामा हो।। अब छोड़ो भी आवारा पन । तुम भटके अश्वत्थामा हो ।। हम धन्य हुए हैं कलयुग में । तुम कितने अच्छे मामा […]

नभ पर फूल सितारे अब खिलते नहीं मियां/दिलजीत सिंह रील

नभ पर फूल सितारे अब खिलते नहीं मियां । क्यों रंग बहारों के भी घुलते। नहीं मियां ।। गन्नों। से। भी। मीठे। रिश्तों में गांठ पड़ी । गांठ। गांठ। में। खोजा वो मिलते नहीं मियां।। पोशाकें सिलते हैं। जो दर्जी। कुदरत। की । क्यों इंसां की। पोशाकें। सिलते। नहीं मियां ।। इश्क का समन्दर है […]

कुछ ऐसे हालात करें/दिलजीत सिंह रील

कुछ ऐसे हालात करें । दिल से दिल की बात करें।। महकी महकी जुल्फों में । रंग रंगीली रात। करें ।। अनहोनी तो होनी है । कुछ मीठे आघात करें।। सुर्ख दहकते अधरों पर । चुंबन की बरसात करें।। जगती के हर लम्हे को । खुशियों की बारात करें।। आने वाले लम्हों को। बचपन के […]

दर्द बिछाया ग़म को ओढ़ा भूख रखी सिरहाने/दिलजीत सिंह रील

दर्द बिछाया ग़म को ओढ़ा भूख रखी सिरहाने । खुशहाली के सपने देखें हम भी क्या दीवाने ।। हम गरीबों की अब इज्जत कहां रही इस दुनियां में। हमको सभी बराबर लगते मंदिर हों या थाने।। वही अकेला नहीं है मुजरिम दुनियां की भीड़ में । हर शख्स यहां पर मुजरिम है जाने या अनजाने […]

दिल में इक शहर बसाया है आपकी खातिर/दिलजीत सिंह रील

दिल में इक शहर बसाया है आपकी खातिर । उसमें फिर प्यार जगाया है आपकी खातिर।। इस झिलमिलाती चांदनी मे डूब कर कोई । आपके नूर से नहाया है आपकी खातिर।। मेरा दीन मेरा ईमान मेरा इश्क है । दिलो जां सबकुछ लुटाया है आपकी खातिर।। फिर मिलेंगे आपने कहा थाजिस जगह वहीं। ये सिर […]