बादशाह -भोज- खंड-45 पद्मावत/जायसी
छागर मेढ़ा बड़ औ छोटे । धरि धरि आने जहँ लगि मोटे ॥ हरिन, रोझ, लगना बन बसे । चीतर गोइन, झाँख औ ससै ॥ तीतर, बटई, लवा न बाँचे । सारस, कूज, पुछार जो नाचे ॥ धरे परेवा पंडूक हेरी । खेहा, गुडरू और बगेरी ॥ हारिल, चरग, चाह बँदि परे । बन-कुक्कुट, जल-कुक्कुट […]
