चित्तौर-आगमन-खंड-35 पद्मावत/जायसी
चितउर आइ नियर भा राजा । बहुरा जीति, इंद्र अस गाजा ॥ बाजन बाजहिं, होइ अँदोरा । आवहिं बहल हस्ति औ घोरा ॥ पदमावति चमडोल बईठी । पुनि गइ उलटि सरग सौं दीठी ॥ यह मन ऐंठा रहै न सूझा । बिपति न सँवरे संपति-अरुझा ॥ सहस बरिस दुख सहै जो कोई । घरी एक […]
