परायों से भी करता प्यार जो जी जान से बढ़कर/ग़ज़ल/डॉ. सीमा विजयवर्गीय
परायों से भी करता प्यार जो जी जान से बढ़कर नहीं दुनिया में कोई देश हिंदुस्तान से बढ़कर उन्हीं के ही तो वंशज हैं वचन के जो रहे पक्के रहा कुछ भी नहीं जिनके लिए सम्मान से बढ़कर अरे अब रोक भी दो मौत के मंज़र ये बंदूकें कहाँ माँ-बाप को कुछ क़ीमती सन्तान से […]
