Year: 2025

भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है/अदम गोंडवी

भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है अहले हिन्दुस्तान अब तलवार के साये में है छा गई है जेहन की परतों पर मायूसी की धूप आदमी गिरती हुई दीवार के साये में है बेबसी का इक समंदर दूर तक फैला हुआ और कश्ती कागजी पतवार के साये में है हम फ़कीरों […]

आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे/अदम गोंडवी

आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे अपने शाहे-वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहे तालिबे शोहरत हैं कैसे भी मिले मिलती रहे आए दिन अख़बार में प्रतिभूति घोटाला रहे एक जनसेवक को दुनिया में अदम क्या चाहिए चार छ: चमचे रहें माइक रहे माला रहे

जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे/अदम गोंडवी

जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे कमीशन दो तो हिंदुस्तान को नीलाम कर देंगे सुरा व सुंदरी के शौक़ में डूबे हुए रहबर दिल्ली को रंगीलेशाह का हम्माम कर देंगे ये वंदेमातरम् का गीत गाते हैं सुबह उठकर मगर बाज़ार में चीज़ों का दुगना दाम कर देंगे सदन को घूस देकर […]

नागार्जुन/कविता/अदम गोंडवी

वामपन्थी सोच का आयाम है नागार्जुन ज़िन्दगी में आस्था का नाम है नागार्जुन ग्रामगन्धी सर्जना उसमें जुलाहे का गुरूर जितना अनगढ़ उतना ही अभिराम है नागार्जुन हम तो कहते हैं उसे बंगाल की खाँटी सुबह केरला की ख़ूबसूरत शाम है नागार्जुन खास इतना है कि सर-आँखों पर है उसका वजूद मुफ़लिसों की झोपड़ी तक आम […]

मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको/अदम गोंडवी

आइए महसूस करिए ज़िन्दगी के ताप को मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको जिस गली में भुखमरी की यातना से ऊब कर मर गई फुलिया बिचारी एक कुएँ में डूब कर है सधी सिर पर बिनौली कंडियों की टोकरी आ रही है सामने से हरखुआ की छोकरी चल रही है छंद के आयाम […]

अकेलापन/कविता/कुमारी सोनम

उसे अकेलेपन से प्यार था, …… मुझे अकेलेपन से डर लगता था। वो अपने आँसू छिपा लेता था, मैं अपने आँसू बहा देती थी। दोनों मिले दोनों को प्यार हुआ, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ, उसे अकेलपन से डर लगने लगा, वो अपने आँसू छिपा न सका। उसने कहा था मुझसे ना बहाना आँसू […]

दोहा/वसंत जमशेदपुरी

यौवन के आकाश में, सुरधनुषी उल्लास। प्रणय-गंध ले बाँटती, मुट्ठी भर वातास।। मेहँदी वाले हाथ में,दिखा गुलाबी फूल। उसे मिलेगा फूल यह,जिस पर प्रभु अनुकूल।। मेहँदी रंजित हाथ हों, अधरों पर मुस्कान। मदमाते दो नयन हों,मौन निमंत्रण जान।। आँखें पत्थर-सी हुईं,प्रिय-दर्शन की आस। हाथ छोड़ मेहँदी करे,अब कुंतल में हास।। विरही मन धीरज धरो, करो […]

बाल दिवस की बधाई/कविता/वसंत जमशेदपुरी

बाल दिवस की बधाई   कूड़े के ढेर से प्लास्टिक चुनते बच्चे को डिब्बे में मिल गई बासी मिठाई | बाल दिवस की बहुत-बहुत बधाई ||   फीस नहीं भर पाया ड्रेस भी थी पुरानी सरेआम टीचर ने कर दी पिटाई | बाल दिवस की बहुत-बहुत बधाई ||   सो गया फुटपाथ पर बिछा कर […]

जल बचाएँ,जीवन बचाएँ/कविता/वसंत जमशेदपुरी

जल बचाएँ,जीवन बचाएँ जब वर्षा का पानी नदियों में और नदी का पानी समुद्र में समाता है फिर समुद्र का पानी पहले भाप और फिर बादल बन जाता है बादल पुनः बरस कर प्रकृति को सरसाता है फिर समझ में नहीं आता है कि पीने का पानी आखिर कहाँ चला जाता है कहीं यह हमारी […]

कविता/वसंत जमशेदपुरी

ईंट ढंग से जोड़िए यह क्या कर रहे हैं आप धड़ाधड़ ईंट जोड़ रहे हैं न तौल न माप गारा भी  नहीं डाल रहे हैं ठीक से हर ईंट भाग रही है पहले की लीक से कोई तिरछी है तो कोई आड़ी है अंधा भी कह देगा यह मिस्त्री अनाड़ी है अरे!आप घर बना रहे […]