Year: 2025

घर में ठण्डे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है/अदम गोंडवी

घर में ठण्डे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है । बताओ कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है । भटकती है हमारे गाँव में गूँगी भिखारिन-सी, ये सुब‍हे-फ़रवरी बीमार पत्नी से भी पीली है । बग़ावत के कमल खिलते हैं दिल के सूखे दरिया में, मैं जब भी देखता हूँ आँख बच्चों की पनीली […]

जिस्म क्या है, रुह तक सब कुछ खुलासा देखिए/अदम गोंडवी

जिस्म क्या है, रुह तक सब कुछ खुलासा देखिए । आप भी इस भीड़ में घुसकर तमाशा देखिए । जो बदल सकती है इस दुनिया के मौसम का मिज़ाज, उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा देखिए । जल रहा है देश, यह बहला रही है क़ौम को, किस तरह अश्लील है संसद की भाषा […]

टी०वी० से अख़बार तक ग़र सेक्स की बौछार हो/अदम गोंडवी

टी०वी० से अख़बार तक ग़र सेक्स की बौछार हो । फिर बताओ कैसे अपनी सोच का विस्तार हो । बह गए कितने सिकन्दर वक़्त के सैलाब में, अक़्ल इस कच्चे घड़े से कैसे दरिया पार हो । सभ्यता ने मौत से डर कर उठाए हैं क़दम, ताज की कारीगरी या चीन की दीवार हो । […]

जिसके सम्मोहन में पाग़ल, धरती है, आकाश भी है/अदम गोंडवी

जिसके सम्मोहन में पाग़ल, धरती है, आकाश भी है । एक पहेली-सी ये दुनिया, गल्प भी है, इतिहास भी है। चिन्तन के सोपान पर चढ़कर चाँद-सितारे छू आए, लेकिन मन की गहराई में माटी की बू-बास भी है । मानव-मन के द्वन्द्व को आख़िर किस साँचे में ढालोगे, महारास की पृष्ठभूमि में ‘ओशो’ का संन्यास […]

मानवता का दर्द लिखेंगे, माटी की बू-बास लिखेंगे/अदम गोंडवी

मानवता का दर्द लिखेंगे, माटी की बू-बास लिखेंगे । हम अपने इस कालखण्ड का एक नया इतिहास लिखेंगे । सदियों से जो रहे उपेक्षित श्रीमन्तों के हरम सजाकर, उन दलितों की करुण कहानी मुद्रा से रैदास लिखेंगे । प्रेमचन्द की रचनाओं को एक सिरे से खारिज़ करके, ये ‘ओशो’ के अनुयायी हैं, कामसूत्र पर भाष […]

बेचता यूँ ही नहीं है आदमी ईमान को/अदम गोंडवी

बेचता यूँ ही नहीं है आदमी ईमान को, भूख ले जाती है ऐसे मोड़ पर इंसान को । सब्र की इक हद भी होती है तवज्जो दीजिए, गर्म रक्खें कब तलक नारों से दस्तरख़्वान को । शबनमी होंठों की गर्मी दे न पाएगी सुकून, पेट के भूगोल में उलझे हुए इंसान को । पार कर […]

विकट बाढ़ की करुण कहानी/अदम गोंडवी

विकट बाढ़ की करुण कहानी नदियों का संन्यास लिखा है। बूढ़े बरगद के वल्कल पर सदियों का इतिहास लिखा है।। क्रूर नियति ने इसकी किस्मत से कैसा खिलवाड़ किया। मन के पृष्ठों पर शकुंतला अधरों पर संत्रास लिखा है।। छाया मंदिर महकती रहती गोया तुलसी की चौपाई लेकिन स्वप्निल, स्मृतियों में सीता का वनवास लिखा […]

गाँव के दिलकश नज़ारों में/अदम गोंडवी

ग़ज़ल को ले चलो अब गाँव के दिलकश नज़ारों में मुसल्सल फ़न का दम घुटता है इन अदबी इदारों में न इन में वो कशिश होगी , न बू होगी , न रआनाई खिलेंगे फूल बेशक लॉन की लम्बी कतारों में अदीबो ! ठोस धरती की सतह पर लौट भी आओ मुलम्मे के सिवा क्या है […]

वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई है/अदम गोंडवी

वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई है उसी के दम से रौनक आपके बंगले में आई है इधर एक दिन की आमदनी का औसत है चवन्नी का उधर लाखों में गांधी जी के चेलों की कमाई है कोई भी सिरफिरा धमका के जब चाहे जिना कर ले हमारा मुल्क इस माने में […]

तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है/अदम गोंडवी

तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है उधर जम्हूरियत का ढोल पीटे जा रहे हैं वो इधर परदे के पीछे बर्बरीयत है ,नवाबी है लगी है होड़ – सी देखो अमीरी औ गरीबी में ये गांधीवाद के ढाँचे की बुनियादी खराबी है तुम्हारी मेज़ चांदी […]