Year: 2025

कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे/गीत/इंदीवर

कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे, तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे तब तुम मेरे पास आना प्रिये, मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिये, कोई जब … अभी तुमको मेरी ज़रूरत नहीं, बहुत चाहने वाले मिल जाएंगे अभी रूप का एक सागर हो तुम, कंवल जितने चाहोगी खिल जाएंगे दर्पण तुम्हें जब […]

फूल तुम्हें भेजा है/गीत/इंदीवर

फूल तुम्हें भेजा है ख़त में, फूल नहीं मेरा दिल है प्रीयतम मेरे तुम भी लिखना, क्या ये तुम्हारे क़ाबिल है प्यार छिपा है ख़त में इतना, जितने सागर में मोती चूम ही लेता हाथ तुम्हारा, पास जो मेरे तुम होती फूल तुम्हें भेजा है ख़त में … नींद तुम्हें तो आती होगी, क्या देखा […]

वक़्त करता जो वफ़ा आप हमारे होते/गीत/इंदीवर

वक़्त करता जो वफ़ा आप हमारे होते हम भी ग़ैरों की तरह आप को प्यारे होते वक़्त करता जो वफ़ा … अपनी तक़दीर में पहले ही कूछ तो ग़म हैं और कुछ आप की फ़ितरत में वफ़ा भी कम है वरन जीती हुई बाज़ी तो ना हारे होते वक़्त करता जो वफ़ा … हम भी […]

छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए/गीत/इंदीवर

छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए प्यार से भी ज़रूरी कई काम हैं प्यार सब कुछ नहीं ज़िंदगी के लिए तन से तन का मिलन हो न पाया तो क्या मन से मन का मिलन कोई कम तो नहीं खुशबू आती रहे दूर से ही सही सामने हो […]

है प्रीत जहाँ की रीत सदा/गीत/इंदीवर

जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने भारत ने मेरे भारत ने दुनिया को तब गिनती आई तारों की भाषा भारत ने दुनिया को पहले सिखलाई देता ना दशमलव भारत तो यूँ चाँद पे जाना मुश्किल था धरती और चाँद की दूरी का अंदाज़ लगाना मुश्किल था सभ्यता जहाँ पहले आई पहले जनमी है जहाँ पे […]

मेरे देश की धरती/गीत/इंदीवर

मेरे देश की धरती, सोना उगले, उगले हीरे मोती बैलों के गले में जब घुंघरू जीवन का राग सुनाते हैं गम कोसों दूर हो जाता है खुशियों के कँवल मुसकाते है सुन के रहट की आवाजें यूं लगे कहीं शहनाई बजे आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे मेरे देश की […]

एशियाई हुस्न की तस्वीर है मेरी ग़ज़ल/अदम गोंडवी

एशियाई हुस्न की तस्वीर है मेरी ग़ज़ल मशरिकी फन में नई तामीर है मेरी ग़ज़ल सालहा जो हीर व राँझा की नज़रों में पले उस सुनहरे ख़्वाब की तामीर है मेरी ग़ज़ल इसकी अस्मत वक्‍त के हाथों न नंगी हो सकी यूँ समझिए द्रौपदी की चीर है मेरी ग़ज़ल दिल लिए शीशे का देखो संग […]

महज़ तनख़्वाह से निपटेंगे क्या नखरे लुगाइ के/अदम गोंडवी

महज़ तनख़्वाह से निपटेंगे क्या नखरे लुगाइ के। हज़ारों रास्ते हैं सिन्हा साहब की कमाई के । ये सूखे की निशानी उनके ड्राइंगरूम में देखो, जो टी० वी० का नया सेट है रखा ऊपर तिपाई के । मिसेज़ सिन्हा के हाथों में जो बेमौसम खनकते हैं, पिछली बाढ़ के तोहफ़े हैं, ये कंगन कलाई के। […]

काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास में/अदम गोंडवी

काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास में उतरा है रामराज विधायक निवास में पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में आजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरह जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा दें संसद बदल […]

सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद है/अदम गोंडवी

सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद है दिल पे रख के हाथ कहिए देश क्या आज़ाद है कोठियों से मुल्क के मेआर को मत आंकिए असली हिंदुस्तान तो फुटपाथ पे आबाद है जिस शहर में मुंतजिम अंधे हो जल्वागाह के उस शहर में रोशनी की बात बेबुनियाद है ये नई पीढ़ी पे मबनी है […]