हवा को साफ़ नदी ताल को भरे रखना/ग़ज़ल/सुभाष पाठक’ज़िया’
हवा को साफ़ नदी ताल को भरे रखना, ये चाहते हो तो जंगल सभी हरे रखना। सुखों दुखों का ही हासिल है ज़िन्दगी यारब, कहीं पे धूप कहीं छांव भी करे रखना। बुलंदियों से ख़ुदाया नवाज़ना मुझको, मगर ग़ुरूर हसद झूठ से परे रखना। किसी के खोटे सौ सिक्कों से लाख बेहतर है, भले हों […]
