क्रोध पर दोहे/दोहा/ नन्दिता माजी शर्मा
क्रोध में उठना उठते हैं जो क्रोध में, बिगड़े उनके काम। जलते हैं वे कोप वश, प्रतिदिन आठों याम।। क्रोध में पूजन पूजन हो जब रोष में, मिलते नहीं दयाल। शीतल मन से जाप हो, करते ईश निहाल।। क्रोध में खाना भोजन हो जब क्रोध में, बिना लगाए भोग। सेहत को लगता नहीं, बढ़ते नाना […]
