सच/कविता/अवतार सिंह संधू ‘पाश’
तुम्हारे मानने या न मानने से सच को कोई फ़र्क नहीं पड़ता। इन दुखते अंगों पर सच ने एक उम्र भोगी है। और हर सच उम्र भोगने के बाद, युग में बदल जाता है, और यह युग अब खेतों और मिलों में ही नहीं, फ़ौजों की कतारों में विचर रहा है। कल जब यह युग […]
