काव्य

ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल/कविता/अमीर खुसरो

ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल, दुराये नैना बनाये बतियां । कि ताब-ए-हिजरां नदारम ऎ जान, न लेहो काहे लगाये छतियां । शबां-ए-हिजरां दरज़ चूं ज़ुल्फ़ वा रोज़-ए-वस्लत चो उम्र कोताह, सखि पिया को जो मैं न देखूं तो कैसे काटूं अंधेरी रतियां । यकायक अज़ दिल, दो चश्म-ए-जादू ब सद फ़रेबम बाबुर्द तस्कीं, किसे पडी है […]

काहे को ब्याहे बिदेस/कविता/अमीर खुसरो

काहे को ब्याहे बिदेस, अरे, लखिय बाबुल मोरे काहे को ब्याहे बिदेस भैया को दियो बाबुल महले दो-महले हमको दियो परदेस अरे, लखिय बाबुल मोरे काहे को ब्याहे बिदेस हम तो बाबुल तोरे खूँटे की गैयाँ जित हाँके हँक जैहें अरे, लखिय बाबुल मोरे काहे को ब्याहे बिदेस हम तो बाबुल तोरे बेले की कलियाँ […]

जब यार देखा नैन भर दिल की गई चिंता उतर/कविता/अमीर खुसरो

जब यार देखा नैन भर दिल की गई चिंता उतर ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाए कर । जब आँख से ओझल भया, तड़पन लगा मेरा जिया हक्का इलाही क्या किया, आँसू चले भर लाय कर । तू तो हमारा यार है, तुझ पर हमारा प्यार है तुझ दोस्ती बिसियार है एक शब मिली […]

छाप तिलक सब छीनी रे/कविता/अमीर खुसरो

छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके प्रेम भटी का मदवा पिलाइके मतवारी कर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके गोरी गोरी बईयाँ, हरी हरी चूड़ियाँ बईयाँ पकड़ धर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके बल बल जाऊं मैं तोरे रंग रजवा अपनी सी रंग दीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके खुसरो निजाम के बल बल जाए […]

बहुत रही बाबुल घर दुल्हन/कविता/अमीर खुसरो

बहुत रही बाबुल घर दुल्हन, चल तोरे पी ने बुलाई। बहुत खेल खेली सखियन से, अन्त करी लरिकाई। न्हाय धोय के बस्तर पहिरे, सब ही सिंगार बनाई। बिदा करन को कुटुम्ब सब आए, सगरे लोग लुगाई। चार कहार मिल डोलिया उठाई, संग परोहत नाई। चले ही बनेगी होत कहाँ है, नैनन नीर बहाई। अन्त बिदा […]

बहुत कठिन है डगर पनघट की/कविता/अमीर खुसरो

बहुत कठिन है डगर पनघट की। कैसे मैं भर लाऊँ मधवा से मटकी मेरे अच्छे निज़ाम पिया। कैसे मैं भर लाऊँ मधवा से मटकी ज़रा बोलो निज़ाम पिया। पनिया भरन को मैं जो गई थी। दौड़ झपट मोरी मटकी पटकी। बहुत कठिन है डगर पनघट की। खुसरो निज़ाम के बल-बल जाइए। लाज राखे मेरे घूँघट […]

ऐ री सखी मोरे पिया घर आए/कविता/अमीर खुसरो

ऐ री सखी मोरे पिया घर आए भाग लगे इस आँगन को बल-बल जाऊँ मैं अपने पिया के, चरन लगायो निर्धन को। मैं तो खड़ी थी आस लगाए, मेंहदी कजरा माँग सजाए। देख सूरतिया अपने पिया की, हार गई मैं तन मन को। जिसका पिया संग बीते सावन, उस दुल्हन की रैन सुहागन। जिस सावन […]

आ अब लौट चले/गीत/शैलेन्द्र

आ अब लौट चले आ अब लौट चले नैन बिछाए बाहें पसारे तुझको पुकारे देश तेरा आ अब लौट चले आ अब लौट चले नैन बिछाए बाहें पसारे तुझको पुकारे देश तेरा आ जा रे आ आ आ सहज है सीधी राह पे चलना देख के उल्झन बच के निकलना कोई ये चाहे माने न […]

मेरा जूता है जापानी/गीत/शैलेन्द्र

मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंगलिस्तानी सर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी मेरा जूता… निकल पड़े हैं खुली सड़क पर अपना सीना ताने – मंज़िल कहाँ कहाँ रुकना है ऊपर वाला जाने – बढ़ते जायें हम सैलानी, जैसे एक दरिया तूफ़ानी सर पे लाल… ऊपर नीचे नीचे ऊपर लहर चले […]

नन्हें-मुन्ने बच्चे ! तेरी मुट्ठी में क्या है ?/गीत/शैलेन्द्र

नन्हें-मुन्ने बच्चे ! तेरी मुट्ठी में क्या है ? मुट्ठी में है तक़दीर हमारी हमने किस्मत को वश में किया है ! भोली-भाली मतवाली आँखों में क्या है ? आँखों में झूमे उम्मीदों की दीवाली आने वाली दुनिया का सपना सजा है ! भीख में जो मोती मिलें, लोगे या न लोगे ? ज़िन्दगी के […]