द्रोणाचार्य के नाम/कविता/अवतार सिंह संधू ‘पाश’
मेरे गुरुदेव! उसी वक़्त यदि आप एक भील बच्चा समझ मेरा अंगूठा काट देते तो कहानी दूसरी थी…………. लेकिन एन।सी।सी। में बंदूक उठाने का नुक्ता तो आपने खुद बताया था कि अपने देश पर जब कोई मुसीबत आन पड़े दुश्मन को बना कर टार्गेट कैसे घोड़ा दबा देना है ……… अब जब देश […]
