जिनकी आँखों में मैंने डर देखा/ग़ज़ल/रचना निर्मल
जिनकी आँखों में मैंने डर देखा ख़त्म उनका वहीं सफ़र देखा उसकी आँखों को तर ब तर देखा इश्क़ का जिस प भी असर देखा वस्ल की बात उससे क्या होती जिसने हमको न इक नज़र देखा अश्क कितना अगर मगर करते हर जगह आफ़तों का घर देखा उसके घर में लगा न अपना दिल […]
