लोकतंत्र/डॉ. शिप्रा मिश्रा
बिछ चुकी है बिसात अब फिर नए सिरे से, झोकेंगे अपनी समूची ताकत और सब खेलेंगे दिमाग़ से अपनी चाल अपनी पारी और मंगरुवा ऐसे ही चलाता रहेगा बिना थके चाय,नाश्ता,पान,सिगरेट,शराब बदले में मिल जाऍंगी कुछ फेंकी हुईं हड्डियाँ इन फेंकी,सूखी,चूसी हडि्ड्यों से ही तो सदियों से पोषित होती रही उसकी समूची बिरादरी और पैदा […]
