कमली चली गई/गीत/धीरज श्रीवास्तव
देख गाँव का भ्रष्ट आचरण कमली चली गई। हँसती गाती रही हमेशा अक्सर ही इतराती थी! संग सुमन के रही खेलती मन ही मन हर्षाती थी! उस उपवन के माली से ही मसली कली गई। देख गाँव का भ्रष्ट आचरण कमली चली गई। माथ पकड़कर झिनकन रोता रोती बहुत कटोरी है! हाय विधाता क्या कर […]
