तुम पर कोई गीत लिखूँ/गीत/धीरज श्रीवास्तव
बहुत दिनोँ से सोच रहा हूँ तुम पर कोई गीत लिखूँ। अन्तर्मन के कोरे कागज पर तुमको मनमीत लिखूँ। लिख दूँ कैसे नजर तुम्हारी दिल के पार उतरती है ! और कामना कैसे मेरी तुमको देख सँवरती है ! पंछी जैसे चहक रहे इस मन की सच्ची प्रीत लिखूँ। बहुत दिनोँ से सोच रहा हूँ […]
