लेखक
-
View all postsरचना निर्मल
जन्मतिथि - 05 अगस्त 1969 जन्म स्थान - पंजाब (जालंधर)
शिक्षा - स्नातकोत्तर
प्रकाशन- 5 साझा संग्रह
उल्लेखनीय सम्मान/पुरस्कार महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार, कई राष्ट्रीय व क्षेत्रीय स्तर पर पुरस्कार
संप्रति - प्रवक्ता ( राजनीति विज्ञान)
संपर्क - 202/A 3rd floor Arjun Nagar
ख़यालों की बना कर डोर हर क़िस्से में रहती है तमन्ना हर घड़ी इस दिल को उकसाने में रहती है गुज़र कर हर घड़ी माज़ी के अफ़्साने में रहती है वो आप को हर वक़्त दुहराने में रहती है कहाँ उसको दिखाई देगा अपना चाक पैराहन जो बस हर वक़्त उलझी ज़ुल्फ़ें सुलझाने में रहती है यही सब सोच कर उम्मीद को ज़िंदा रखा दिल में सहर की आँच भी कुछ देर तो तारे में रहती है भला इस्लाह उसकी काम क्या आएगी अपने जो सुलझती बात को भी यार उलझाने में रहती है तू माने या न माने पर हक़ीक़त है यही “निर्मल” समझ अच्छे बुरे की उसके हर बंदे में रहती है
क़िस्से में रहती है/ग़ज़ल/रचना निर्मल
