Year: 2025

छोटा-सा घर होगा बादलों की छाँव में/गीत/शैलेन्द्र

छोटा-सा घर होगा बादलों की छाँव में आशा दीवानी मन में बँसुरी बजाए हम ही हम चमकेंगे तारों के उस गाँव में आँखों की रौशनी हरदम ये समझाए चाँदी की कुर्सी पे बैठे मेरी छोटी बहना सोने के सिंहासन पे बैठे मेरी प्यारी माँ मेरा क्या मैं पड़ा रहूँगा अम्मीजी के पाँव में आ आ […]

टूटे हुए ख़्वाबों ने/गीत/शैलेन्द्र

टूटे हुए ख़्वाबों ने, हमको ये सिखाया है दिल ने, दिल ने जिसे पाया था, आँखों ने गंवाया है टूटे हुए ख़्वाबों ने हम ढूँढते हैं उनको, जो मिलके नहीं मिलते रुठे हैं न जाने क्यूँ, मेहमान मेरे दिल के क्या अपनी तमन्ना थी, क्या सामने आया है दिल ने, दिल ने … टूटे हुए […]

हम तो जाते अपने गाम/गीत/शैलेन्द्र

मुबारक देने आए थे, मुबारक देके जाते हैं मिला है बहुत कुछ, सीने में जो हम लेके जाते हैं हम तो जाते अपने गाम, अपनी राम-राम-राम अपनी राम-राम-राम, सबको राम-राम-राम हम तो जाते अपने गाम, अपनी राम-राम-राम सबको राम-राम-राम कभी जो कह ना पाए बात, वो होंठों पे अब आई अदालत उठ चुकी है, अब […]

किसीने अपना बनाके मुझको मुस्कुराना सिखा दिया/गीत/शैलेन्द्र

किसीने अपना बनाके मुझको मुस्कुराना सिखा दिया अँधेरे घर में किसीने हँसके चराग़ जैसे जला दिया किसीने अपना बनाके मुझको मुस्कुराना सिखा दिया शरम के मारे मैं कुछ ना बोली नज़र ने पर्दा गिरा दिया मगर वो सबकुछ समझ गए हैं, कि दिल भी मैंने गँवा दिया किसीने अपना बनाके मुझको मुस्कुराना सिखा दिया न […]

ये मेरा दीवानापन है/गीत/शैलेन्द्र

दिल से तुझको बेदिली है, मुझको है दिल का गुरूर तू ये माने के न माने, लोग मानेंगे ज़ुरूर ये मेरा दीवानापन है, या मुहब्बत का सुरूर तू न पहचाने तो है ये, तेरी नज़रों का क़ुसूर ये मेरा दीवानापन है … दिल को तेरी ही तमन्ना, दिल को है तुझसे ही प्यार चाहे तू […]

याद न जाए, बीते दिनों की/गीत/शैलेन्द्र

याद न जाए, बीते दिनों की जाके न आये जो दिन, दिल क्यूँ बुलाए, उन्हें दिल क्यों बुलाए याद न जाये … दिन जो पखेरू होते, पिंजरे में मैं रख देता पालता उनको जतन से पालता उनको जतन से, मोती के दाने देता सीने से रहता लगाए याद न जाए … तस्वीर उनकी छुपाके, रख […]

दोस्त दोस्त ना रहा/गीत/शैलेन्द्र

दोस्त दोस्त ना रहा प्यार प्यार ना रहा ज़िंदगी हमें तेरा ऐतबार ना रहा, ऐतबार ना रहा अमानतें मैं प्यार की गया था जिसको सौंप कर वो मेरे दोस्त तुम ही थे तुम्हीं तो थे जो ज़िंदगी की राह मे बने थे मेरे हमसफ़र वो मेरे दोस्त तुम ही थे तुम्हीं तो थे सारे भेद […]

चलत मुसाफ़िर मोह लियो रे पिंजड़े वाली मुनिया/गीत/शैलेन्द्र

चलत मुसाफ़िर मोह लियो रे पिंजड़े वाली मुनिया उड़ उड़ बैठी हलवइया दुकनिया हे रामा!!!! उड़ उड़ बैठी हलवइया दुकनिया आरे!! बरफ़ी के सब रस ले लियो रे पिंजड़े वाली मुनिया अ हे अ हे … हे रामा उड़ उड़ बैठी बजजवा दुकनिया आहा!!!! उड़ उड़ बैठी बजजवा दुकनिया आरे! कपड़ा के सब रस ले […]

सबकुछ सीखा हमने/गीत/शैलेन्द्र

सबकुछ सीखा हमने ना सीखी होशियारी सच है दुनियावालों के हम हैं अनाड़ी दुनिया ने कितना समझाया कौन है अपना कौन पराया फिर भी दिल की चोट छुपाकर हमने आपका दिल बहलाया ख़ुद ही मर मिटने की ये ज़िद है हमारी दिल का चमन उजडते देखा प्यार का रँग उतरते देखा हमने हर जीनेवाले को […]

जब गिला वो करें चुप रहा हम करें/ग़ज़ल/रचना निर्मल

जब गिला वो करें चुप रहा हम करें क़र्ज़ चाहत का ऐसे अदा हम करें वो करें बेवफ़ाई वफ़ा हम करें आप ही अब कहें और क्या हम करें कोई आ कर बता जाए इतना हमें कैसे  बेताब दिल की दवा हम करें चाहे दुनिया करे लाख ज़ुल्म-ओ-सितम दिल को दिल से न फिर भी […]