पानी तेरे नाम है/सुशील सरित

लेखक

  • सुशील सरित
    माता : श्रीमती विमला देवी
    पिता: श्री रामेश्वर नंदन सहाय सक्सेना
    जन्म तिथि : 30.09.1952
    शैक्षिक योग्यता: एम ए (मनोविज्ञान)
    जन्म स्थान: कानपुर
    प्रकाशित कृतियां: "देश तुझे क्या दूं " 1982 से 2022 तक 78कृतियां प्रकाशित।
    पुरस्कार:
    उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का "नन्हे-मुन्ने गीत" को सर्जना पुरस्कार तथा 'अंतर्द्वंद्व' को जयशंकर प्रसाद नामित पुरस्कार।
    विशिष्ट सम्मान: उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा २०२२ में
    साहित्य भूषण सम्मान (₹250000 )
    देश की सभी स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं में 3000 से अधिक रचनाएं प्रकाशित

    View all posts

पानी तेरे नाम है, कितने-कितने रूप।

जहां नज़र डाली मिले, सारे रूप अनूप।।-1

है औषधि सम शुद्ध जल, तन को करे निरोग।

हो अशुद्ध तो जल यही, दे कितने ही रोग।।-2

पानी  जमकर जब गिरे, बने वो ओला मीत।

गिरकर जमता तो बरफ, कहें उसे यह रीत।।-3

पानी हो यदि फूल पर, कहलाता वह ओस।

निकले फूलों से बने, इत्र उड़ाए होश।।-4

बहता पानी है नदी, जमा हुआ तो झील।

भंवर बने तो तुरत ही, जाता जीवन लील।।-5

पानी है यदि शुद्धतम, तो गंगा की धार।

हो अशुद्ध तो दे सदा, तन को कष्ट अपार ।।-6

मिले दूध में तो बने, पानी दूध समान।

मय में मिलकर मय बने, खोकर अपना मान।।-7

कहते हैं इस सृष्टि का, पानी है प्रारंभ।

लेकिन रखता यह नहीं, मन में कोई दम्भ।।-8

पानी से ही यह धरा, लगती जैसे पर्व।

अपनी पर आ जाए तो, टूटें सबके गर्व।।-9

पांच तत्व हैं प्रकृति में, कहता है विज्ञान।

पानी ही इनमें मगर, है प्रधान लें जान।।-10

पानी के सम्मान को, कैसे जाएं भूल।

कहते पानीदार को, एक शब्द है शूल।।-11

सागर मंथन की कथा, का इतना सा सार।

जो मन को मथ ले मिले, उसको रतन अपार।।-12

सुशील सरित

पानी तेरे नाम है/सुशील सरित

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *