जागा लाखों करवटें/नरेश शांडिल्य
जागा लाखों करवटें, भीगा अश्क हज़ार। तब जा कर मैंने किए, काग़ज काले चार।।1 छोटा हूँ तो क्या हुआ, जैसे आँसू एक। सागर जैसा स्वाद है, तू चखकर तो देख।।2 मैं ख़ुश हूँ औज़ार बन, तू ही बन हथियार। वक़्त करेगा फ़ैसला, कौन हुआ बेकार।।3 तू पत्थर की ऐंठ है, मैं पानी की लोच। तेरी […]
