दोहा

जागा  लाखों करवटें/नरेश शांडिल्य

जागा  लाखों करवटें, भीगा अश्क हज़ार। तब जा कर मैंने किए, काग़ज काले चार।।1 छोटा हूँ तो क्या हुआ, जैसे आँसू एक। सागर जैसा स्वाद है, तू चखकर तो देख।।2 मैं ख़ुश हूँ औज़ार बन, तू ही बन हथियार। वक़्त करेगा फ़ैसला, कौन हुआ बेकार।।3 तू पत्थर की ऐंठ है, मैं पानी की लोच। तेरी […]

अब न बनारस की सुबह अब न अवध की शाम/भारतेन्दु मिश्र

अब न बनारस की सुबह अब न अवध की शाम। राजनीति करने लगी सड़कों पर व्यायाम।1। कैची के दो फल हुए नेता अफ़सर एक।       प्रजातंत्र की ओढ़नी रहे काटकर फेंक।2। काट बरगदों की जड़ें करते हैं उद्योग। गमलों में बोने लगे बौनेपन को लोग।3। यह जहरीली बावड़ी इसमें पलते नाग। खेला करते थे यहां हिलमिल […]

वृक्ष कहें कुछ आपसे/बृंदावन राय सरल

वृक्ष कहें कुछ आपसे, हमें न कांटों व्यर्थ । वरना होगा एक दिन, सच में बड़ा अनर्थ ।।-1 कायनात छोटी लगे, ऐसा  अपना  प्यार । मुठ्ठी भर आकाश है, दो  डग  है  संसार ।।-2 जग संदेशा दे रही, कोयल की  हर  कूक । सबसे मिलिए प्रेम से, करिऐ नेक  सुलूक ।।-3 आँसू पीकर जी रहा,इस […]

शायद अब  ये  हो  गई/कुँवर कुसुमेश

शायद अब  ये  हो  गई, वर्तमान  की  शान । फोटो खिंचवा लीजिए, जब भी करिए दान ।।-1 संविधान की दृष्टि में,सब हैं एक समान । चाहे निर्धन व्यक्ति हो, या कोई धनवान ।।-2 अगर चाहते आप हैं, सुख जीवन पर्यन्त । तो नेता बन जाइये, या फिर  साधू-सन्त ।।-3 राम तुम्हारी भी रही,  लीला  अपरंपार […]

मन्दिर से  लेकर चले/डॉ. नलिन

मन्दिर से  लेकर चले , जीने  का  वरदान । आकर वाहन से भिड़े , गये वहीं पर प्राण ।।-1 दादी , नानी के  फले , आधे  ही  आशीष । दूध कहीं मिलता नहीं , पूत हुए दस-बीस ।।-2 श्रद्धा से था खा लिया , माथे लगा प्रसाद । अस्पताल पहुंचा दिए , ज़रा देर के […]

टीवी  ही  माता-पिता/दिनेश रस्तोगी

टीवी  ही  माता-पिता, मोबाइल  गुरु  ज्ञान । नए कपोतों  को मिली,भटकन भरी उड़ान ॥-1 निष्ठाएँ  गिरवीं  हुईं,   कुंठित  है  विश्वास । प्रतिभा को करना पड़ा,आजीवन उपवास ॥-2 शोर,धुआँ,उलझन,घुटन, भीड़,जाम, हड़ताल । महानगर  ढोते  रहे ,    हम  यूँ  सालों  साल ॥-3 सजल नयन को देखकर,बोला खारा सिंधु । मुझसे अधिक विराट हैं, तेरे  ये  जलविंदु ॥-4 […]

जीवनदाता प्रकृति से/ज्योतिर्मयी पन्त

जीवनदाता प्रकृति से, करें  नहीं  खिलवाड़ । सारे स्वारथ सिद्ध हों , सदा उसी की आड़ ।।-1 नदियां  बहती  थी  यहां ,   लेकर   शीतल  नीर । कलुषित हम ने कर दिया, समझ सके कब पीर ।।-2 कूड़ा  करकट  गंदगी,  फेंकी  नदिया  तीर । जल को दूषित कर चले, फोड़ रहे तकदीर ।।-3 धूल धुएँ  से […]

सागर   में    सहरा    दिखे/विज्ञान व्रत

ज्यों   पानी   पर  आग  हो , छाँव  पहन  ले  धूप। सागर   में    सहरा    दिखे ,  ऐसा    तेरा     रूप।।1 नोचें   भी   यदि  फूल  को ,  देता    है     मकरन्द। बहे  क्रौञ्च   की   पीर  से ,  आदि अनुषटुप छन्द।।2 मैं    तो    पूरे    दृश्य   का , समझा  यह   निहितार्थ। युद्ध  […]

करो न जीवन में कभी/डॉ. शंकर शरण लाल बत्ता

करो न जीवन में कभी, ऐसा खोटा काम। जिसके पश्चाताप में, बीते उम्र तमाम।।-1 कल क्या होगा भूल जा , मत कर कल को याद। अच्छा हो यदि आज से, कर ले तू संवाद ।।-2 करते जो माँ-बाप की, सेवा भली प्रकार । खुल जाते उनके लिए, स्वत:  स्वर्ग के द्वार।।-3 उगता सूरज भोर का, […]