बसंत-खंड-20 पद्मावत/जायसी
दैऊ देउ कै सो ऋतु गँवाई । सिरी-पंचमी पहुँची आई ॥ भएउ हुलास नवल ऋतु माहाँ । खिन न सोहाइ धूप औ छाहाँ ॥ पदमावति सब सखी हँकारी । जावत सिंघलदीप कै बारी ॥ आजु बसंत नवल ऋतुराजा । पंचमि होइ, जगत सब साजा ॥ नवल सिंगार बनस्पति कीन्हा । सीस परासहि सेंदुर दीन्हा ॥ […]
