फिर धीरे-धीरे यहां का मौसम बदलने लगा है/दुष्यंत कुमार
फिर धीरे-धीरे यहां का मौसम बदलने लगा है, वातावरण सो रहा था अब आंख मलने लगा है पिछले सफ़र की न पूछो , टूटा हुआ एक रथ है, जो रुक गया था कहीं पर , फिर साथ चलने लगा है हमको पता भी नहीं था , वो आग ठण्डी पड़ी थी, जिस आग पर आज […]
