जिसके सम्मोहन में पाग़ल, धरती है, आकाश भी है/अदम गोंडवी
जिसके सम्मोहन में पाग़ल, धरती है, आकाश भी है । एक पहेली-सी ये दुनिया, गल्प भी है, इतिहास भी है। चिन्तन के सोपान पर चढ़कर चाँद-सितारे छू आए, लेकिन मन की गहराई में माटी की बू-बास भी है । मानव-मन के द्वन्द्व को आख़िर किस साँचे में ढालोगे, महारास की पृष्ठभूमि में ‘ओशो’ का संन्यास […]
