लेखक
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ए.एफ़. ’नज़र’
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जन्म -30 जून,1979
गाँव व डाक- पिपलाई, तहसील- बामनवास
ज़िला- गंगापुर सिटी (राज), पिन- 322214
मोबाइल - 9649718589
Email- af.nazar@rediffmail.com
चूल्हा-चौका-फ़ाइल-बच्चे दिनभर उलझी रहती है,
वो घर में और दफ़्तर में अब आधी-आधी रहती है।
मिल कर बैठें दुख-सुख बाँटें इतना हमको वक़्त कहाँ,
दिन उगने से रात गये तक आपा-धापी रहती है।
जिस दिन से तक़रार हुई उन सियह गुलाबी होंठों में,
दो कजरारी आँखों के संग छत भी जागी रहती है।
जब से पछुआ पवनें घर में आना-जाना आम हुईं,
तुलसी मेरे आँगन की कुछ सहमी-सहमी रहती है।
क्या अब भी घुलती हैं रातें चाँद परी की बातों में,
क्या तेरे आँगन में अब भी बूढ़ी दादी रहती है।
चूल्हा-चौका-फ़ाइल-बच्चे दिनभर उलझी रहती है/ग़ज़ल/ए.एफ़. ’नज़र’
