उदास रहने को अपनी ख़ुशी बताता है/गज़ल/डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफरी

लेखक

  • डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफरी
    जन्म -10 जनवरी 1978, बेगूसराय, बिहार
    हिन्दी,शिक्षा शास्त्र,और अंग्रेजी में स्नातकोत्तर,बीएड और पत्रकारिता,पीएच-डी हिन्दी, यू जी सी नेट हिन्दी.
    -खुले दरीचे की खुशबू, खुशबू छू कर आई है (हिन्दी ग़ज़ल )परवीन शाकिर की शायरी, गजल लेखन परंपरा और हिंदी ग़ज़ल का विकास, डॉ.भावना का गजल साहित्य चिंतन और दृष्टि(आलोचना)चांद हमारी मुट्ठी में है, आख़िर चांद चमकता क्यों है, मैं आपी से नहीं बोलती (बाल कविता )आदि पुस्तकें प्रकाशित, हिंदी, उर्दू और मैथिली की तमाम राष्ट्रीय पत्र -पत्रिकाओं में नियमित लेखन आकाशवाणी और दूरदर्शन से लगातार प्रसारण विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों द्वारा सौ से अधिक पुरस्कार तथा सम्मान.
    वृत्ति -अध्यापन
    पत्राचार -ग्राम /पोस्ट -माफ़ी, वाया -अस्थावां, ज़िला-नालंदा, बिहार 803107, मोबाइल 9934847941,620525425
    zeaurrahmanjafri786@gmail.com

    View all posts
मैं जनता हूं कहां वो सही बताता है
उदास रहने को अपनी ख़ुशी बताता है

 निकलना जब भी तो होशो हवास भी रखना
यहां पे झूट हर इक आदमी बताता है

हमें पता है कि वो ज़िंदा मार डाला गया
वो डॉक्टर कि जिसे ख़ुदकुशी बताता है

यों आके पर्दे पे बे हिस सा मुस्कुराते हुए
जो हादसा है उसे आलमी बताता है

तुम्हारे साथ जो गुम सुम बना सा रहता है
हमें तो बात वही आज भी बताता है
उदास रहने को अपनी ख़ुशी बताता है/गज़ल/डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफरी

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *