मेघदूत यायावर लेकर ,
खुशियों का संदेश।
शृंग पार से आया न्यासी,
अमित लगे परिवेश ।
श्वेत-श्याम में उलझे नैना,
कजरी के शृंगार ।
चहुँदिक डोले बादल छौने,
क्या मधुबन क्या थार ।
दूब दूब पर मोती मानिक,
भरे धरा के गोद,
पाकर आँचल को हुलसाये,
अम्बर से सित धार ।
उमड़ घुमड़ नभ से कजरारी,
रही सँवारे केश ।
अमित लगे परिवेश ।——
सावन-भादों की हरियाली,
चंचल लगे अधीर,
सहज सुखद हो रक्षाबंधन
कवच हमारे वीर ।
तीज सावनी हर हर बम बम
शिव भक्तों के धाम,
घन घोर घटा घननाद घने,
चमके चपला तीर ।
नभ से आतुर झाँके चंदा
नहीं चैन लवलेश ।
अमित लगे परिवेश ।——
सरस हो उठी बोझिल अवनी
जन-जन में उल्लास ।
नभ से थल तक अनुपम रचकर
वैभव चातुर्मास ।
मधुर मधुर अम्लान साधना
भरे हृदय अनुराग,
नित आये प्रभु सुखद सबेरा,
#लता करे अरदास ।
थिरक उठे पग मन मयूर के
विनय सुनों भुवनेश ।
अमित लगे परिवेश ।
डॉ प्रेमलता त्रिपाठी
