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View all postsमनोज जैन25, दिसम्बर,1975जन्म स्थान : ग्राम बामौर कला ,जिला शिवपुरी मध्य प्रदेशशिक्षा : अंग्रेजी साहित्य में स्नात्कोत्तर, डी .एड.प्रकाशित कृतियाँ-एक बूँद हम (नवगीत संग्रह 2011)धूप भरकर मुट्ठियों में (नवगीत संग्रह 2021)बच्चे होते फूल से (बालगीत सँग्रह 2025)अनेक शोध सन्दर्भ ग्रन्थों में नवगीत सम्मिलितसोशल मीडिया के चर्चित (नवगीत पर एकाग्र साहित्यिक) समूह~ ।।वागर्थ।। ~के संचालकप्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का नियमित प्रकाशनआकाशवाणी एवं दूरदर्शन से समय समय पर प्रसारणपता : 106 विट्ठल नगर गुफामन्दिर रोड़ लालघाटी भोपाल 4620309301337806
चुप्पी ओढ़े रात खड़ी है
सन्नाटे दिन बुनता
हुआ यंत्रवत
यहाँ आदमी
नहीं किसी की सुनता
सबके पास
समय का टोटा
किससे !
अपना सुख – दुख बाँटें
दिन पहाड़ से कैसे काटें !
बात-बात में
टकराहट है
यहाँ नहीं दिल मिलते
ताले जड़े हुए
होठों पर
हाँ ना में सिर हिलते
पीढ़ीगत इस
अंतराल की
खाई को अब कैसे पाटें!
दिन पहाड़ से कैसे काटें !
पीर बदलते
हाल देखकर
पढ़ने लगी पहाड़े
तोड़ रहा दम
ढाई आखर
उगने लगे अखाड़े
मन में रहे
कुहासे गहरे
इन बातों से कैसे छाँटें !
दिन पहाड़ से कैसे काटें !
उगने लगे अखाड़े/गीत/मनोज जैन
