प्रकाशन- मेरे गांव की चिनमुनकी (गीत संग्रह) 'धीरज श्रीवास्तव के गीत( डॉ.सुभाष चंद्र द्वारा संपादित)
साझा संग्रह--- समकालीन गीतकोश, ग़ज़ल ए गुलदस्त, पांव गोरे चांदनी के, कवितालोक उद्भास, शुभमस्तु,क़ाफ़ियाना, मीठी सी तल्खियां -भाग -2,3,और 4,दोहे के सौ रंग,गीतिकालोक, कुण्डलिनी लोक,तेरी यादें, अनवरत -3, अन्तर्मन, तलाश, मंजर, शब्दों के इन्द्र धनुष,कवि का कहना है, गुनगुनाएं गीत फिर से, एहसासों की पंखुड़ियां, गीत प्रसंग आदि में रचनाओं के प्रकाशन सहित राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं एवं ई पत्रिकाओं में रचनाओं का निरंतर प्रकाशन।
सम्मान--अनेक सम्मान एवं पुरस्कार।
संप्रति --- संस्थापक सचिव, साहित्य प्रोत्साहन संस्थान, एवं "साहित्य रागिनी" वेब पत्रिका।
तड़पे,सिसके,छुए निहारे
चूमे प्रेम निशानी मन।
लौट न पाता पास तुम्हारे
किन्तु हठी,अभिमानी मन।
किया हवा ने छल बादल से,
चली छुड़ाकर हाथ अचानक।
ठहर गया बढ़ सका न आगे,
रहा अधूरा प्रेम कथानक।
बुने उसी को साँझ सकारे,
पल पल गढ़े कहानी मन।
लौट न पाता पास तुम्हारे
किन्तु हठी, अभिमानी मन।
पलकों की चौखट पर बैठे
स्वप्न अपाहिज डाले आसन ।
लौटेगी बैसाखी लेकर ,
नींद नहीं देती आश्वासन।
उम्मीदों पर रात गुजारे
पड़े पड़े सैलानी मन।
लौट न पाता पास तुम्हारे
किन्तु हठी,अभिमानी मन।
इठलाती चंचल लहरों पर,
डाल रहा सन्नाटा डोरे।
नाम रेत पर लिखें उंगलियां
विरह वेदना सीप बटोरे।
रोज उलचता बैठ किनारे,
नम आँखों का पानी मन।
लौट न पाता पास तुम्हारे
किन्तु हठी, अभिमानी मन
बिखर गया था जहाँ प्रणय का,
रिश्ता नाज़ुक धागों वाला।
गूँथे जहाँ मौन आकुलता,
अनुबन्धों की टूटी माला।
खड़ा वहीं से तुम्हें पुकारे,
करने को अगवानी मन।
लौट न पाता पास तुम्हारे
किन्तु हठी,अभिमानी मन।