लोहा/कविता/अवतार सिंह संधू ‘पाश’
आप लोहे की कार का आनन्द लेते हो मेरे पास लोहे की बन्दूक़ है मैंने लोहा खाया है आप लोहे की बात करते हो लोहा जब पिघलता है तो भाप नहीं निकलती जब कुठाली उठाने वालों के दिल से भाप निकलती है तो लोहा पिघल जाता है पिघले हुए लोहे को किसी भी आकार […]
