बाद में बातें करूँगा आपसे,
मैं अभी यश मालवीय को,
पढ़ रहा हूँ।
वाल क्या है आईना है,
यह समय का,
भरा पूरा एक दस्तावेज है।
लोकधर्मी चेतना के,
साथ में प्रतिरोध का,
यह अकेला आधिकारिक पेज है।
पेज पढ़ यश मालवीय का,
मैं स्वयं को स्वयं में ही,
गढ़ रहा हूँ।
बाद में बातें करूँगा आपसे,
मैं अभी यश मालवीय को,
पढ़ रहा हूँ।
गीत हो या गज़ल कोई ,
व्यंजना के ,
साथ पूरा अर्थ सजता है।
आप इनका गद्य पढ़कर,
देखिए कान में,
प्यारा मधुर संतूर बजता है।
साधना से यश शिखर पर हैं
और मैं सोपान
पहला चढ़ रहा हूँ।
बाद में बातें करूँगा आपसे,
मैं अभी यश मालवीय को,
पढ़ रहा हूँ।
यश मालवीय/गीत/मनोज जैन
