अगरचे नाम ये अपने हमारा कुल बताते हैं/गज़ल/अविनाश भारती

लेखक

  • अविनाश भारती
    जन्मस्थान- मुजफ्फरपुर
    जन्मतिथि- 08 जनवरी 1995
    शिक्षा - पीएचडी (शोधरत)
    सम्प्रति (व्यवसाय)- सहायक प्राध्यापक
    लेखन विधाएँ- ग़ज़ल, आलोचना

    • प्रकाशित पुस्तकें -
    1.अदम्य (ग़ज़ल संग्रह)
    2.बाबा बैद्यनाथ झा की ग़ज़ल साधना
    3. हिन्दी ग़ज़ल के साक्षी

    • प्रकाशन
    कई साझा संकलन में ग़ज़लें प्रकाशित, हंस, वागर्थ, साहित्य अमृत, ककसाड़, गीत गागर, हरिगंधा, प्रेरणा अंशु, श्री साहित्यारंग, दैनिक जागरण, प्रभात ख़बर, हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, कविता कोश, अमर उजाला काव्य आदि पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर ग़ज़लें प्रकाशित।

    • प्रसारण -
    दूरदर्शन एवं आकाशवाणी,पटना पर निरंतर ग़ज़लों का प्रसारण

    • सम्मान/पुरस्कार-
    नागार्जुन काव्य सम्मान 2020, साहित्य सर्जक सम्मान-2023, बिहार गौरव सम्मान- 2023

    • संपर्क -
    ग्राम+ पोस्ट - अहियापुर
    प्रखण्ड - साहेबगंज
    जिला - मुजफ्फरपुर (बिहार)
    पिनकोड- 843125
    ईमेल- avinash9889@gmail.com
    मोबाइल नं०- 9931330923

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नज़र जिनको मिली हमसे वही आँखें दिखाते हैं
क़दम कैसे कहाँ रक्खें हमें बच्चे बताते हैं

कहीं जो बैठ जाएं दोस्तों के साथ फुर्सत से
हमें छुटपन के दिन अपने हँसाते-गुदगुदाते हैं

जो सूखा और बरखा में सभी का पेट भरते हैं
उधारी में वही हलधर चिता खुद की सजाते हैं

हमारे नाम में महके वतन की धूल-मिट्टी-कण
अगरचे नाम ये अपने हमारा कुल बताते हैं

किताबी बात को पढ़कर फ़क़त कुछ भी नहीं होता
चलो आओ सफ़र में हम यहाँ इंसां बनाते हैं

कहाँ ‘अविनाश’ सोए हो ग़मों से बेख़बर होके
चलो अबतो किसी के ज़ख़्म पे मरहम लगाते हैं

अगरचे नाम ये अपने हमारा कुल बताते हैं/गज़ल/अविनाश भारती

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