जीवन चक्र/देवेंद्र जेठवानी

लेखक

  • देवेंद्र जेठवानी
    जन्मतिथि :- 14/09/1992

    जन्म स्थान :- भोपाल (म.प्र.)
    निवास स्थान :- भोपाल (म.प्र.)
    शिक्षा :- B.Com Graduation

    M.B.A. (marketing, finance) मास्टर्स
    रूची :- कविता, ग़ज़ल, शेर, शायरी
    पेशा :- प्राइवेट कर्मचारी ( प्राइवेट बैंक में कार्यरत)

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छूट जाएगी सब यहीं नौकरी-चाकरी,
ख़त्म यहीं सब व्यापार होगा,
शमशान ही होगा अंतिम मंज़िल तेरी,
बस मृत्यु ही जीवन का सार होगा,
तेरा ये रुतबा, तेरी ये सारी रसूखदारी,
बाक़ी न ही कोई भंडार होगा,
टूटेगी जब ये साँसों की माला,
इसका फ़िर न कोई उपचार होगा,
यही होता आया है, यही होता आएगा,
जन्म-मरण का यह क्रम, यूँही बारम्बार होगा,
कोई फ़र्क नहीं पड़ता, तेरे या मेरे चाहने या न चाहने से,
होगा बस वही जो उस ईश्वर को स्वीकार होगा,
तेरे जाने के बाद भी, होंगी तेरी ही बातें,
कुछ कहेंगे अच्छा, कुछ कटाक्ष का प्रहार होगा,
फ़िर न होगा कोई दंद-फंद, न कोई इच्छा,
और न ही कोई इन्कार होगा,
टूटेगी जब ये साँसों की माला,
इसका फ़िर न कोई उपचार होगा,
शमशान ही होगा अंतिम मंज़िल तेरी,
बस मृत्यु ही जीवन का सार होगा,
जीवन चक्र/देवेंद्र जेठवानी

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