रचना निर्मल की 51 ग़ज़लें
ग़ज़ल 1 मेरे ख़्वाबों में रोज़...
जब गिला वो करें चुप रहा हम करें/ग़ज़ल/रचना निर्मल
जब गिला वो करें चुप रहा हम करें...
लगाता रोज़ मैं चहरा नया हूँ/ग़ज़ल/रचना निर्मल
लगाता रोज़ मैं चहरा नया हूँ तेरा...
आपकी आँखें हमारी राहत ए जाँ हो गईं/ग़ज़ल/रचना निर्मल
आपकी आँखें हमारी राहत ए जाँ हो...
जिसकी ख़ातिर हार बैठी है/ग़ज़ल/रचना निर्मल
अपना सब कुछ जिसकी ख़ातिर हार...
बुरा तो किसी को ये अच्छा लगा/ग़ज़ल/रचना निर्मल
बुरा तो किसी को ये अच्छा लगा...
यूँ भी ख़ुद को आज़माते हम/ग़ज़ल/रचना निर्मल
शब ए फ़िराक़ यूँ भी ख़ुद को आज़माते...
हवाएँ उस तरफ़ तूफ़ान लाना चाहती हैं/ग़ज़ल/रचना निर्मल
हवाएँ उस तरफ़ तूफ़ान लाना चाहती...
जिनकी आँखों में मैंने डर देखा/ग़ज़ल/रचना निर्मल
जिनकी आँखों में मैंने डर देखा...
रूह अपनी न हुई जिस्म भी अपना न हुआ/ग़ज़ल/रचना निर्मल
रूह अपनी न हुई जिस्म भी अपना...
