उद्धव-शतक/जगन्नाथदास रत्नाकर
By जगन्नाथदास रत्नाकर
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मंगलाचरण जासौं जाति बिषय-बिषाद की बिवाई बेगि, चोप-चिकनाई चित चारु गहिबौ करै। कहै रतनाकर कबित्त-बर-व्यंजन में, जासौं स्वाद सौगुनौ रुचिर...
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नमस्कार,
साहित्य रत्न परिवार आज अपने तीन वर्ष पूर्ण कर रहा है। हमने अपने तृतीय स्थापना दिवस के अवसर पर गद्य व पद्य में एक-एक लेखक को सम्मानित करने की योजना बनाई थी जिसके अन्तर्गत चयनित रचनाकार को सम्मानपत्र व 1100रू. ‘ऑनलाइन माध्यम से’ देने की घोषणा की गई थी, जिसके लिए हमें लगभग 240 रचनाकारों की रचनाएँ प्राप्त हुईं। हमारी चयन समिति द्वारा चयनित रचनाकार उमेश महादोषी जी बरेली व सतीश राठी जी इन्दौर रहे।
चयन समिति
अध्यक्ष-बलराम अग्रवाल, उपाध्यक्ष-डाॅ. बिपिन पाण्डेय, संपादक-राम अवतार बैरवा, संस्थापक- सुरजीत मान जलईया सिंह
अगर आप भी कुछ लिखते हैं, तब यह जगह आपके लिए ही है। अपनी रचनाएँ हमें भेजिए। ‘साहित्यरत्न ’ पर आपकी रचनाओं का स्वागत है।