झड़ियां लगीं जो सावन में/मो. शकील अख़्तर
उगा रहे हैं सभी आंखों में बबूलों...
लाचार भी कर सकता है/मो. शकील अख़्तर
वक़्त इक संग को शाहकार भी कर...
मुश्किल सफ़र हुआ है/मो. शकील अख़्तर
तेरे बदन का दहकता गुलाब देखूंगा...
इश्क़ में सौदा नहीं किया/मो. शकील अख़्तर
फिर क़हक़हा उठा है उसी गुलसितान...
अंगड़ाई जो आंखें उन की/मो. शकील अख़्तर
शोख़ मंज़र रुख़े ज़ेबा का लुभाता...
इश्क़ की रुसवाईयों में है/मो. शकील अख़्तर
इक ज़लज़ला सुकूत का तनहाईयों...
घर बनाने की/मो. शकील अख़्तर
मिली जो मुझ को ख़बर ज़ल्ज़लों...
मुहब्बत में बुलंदी के लिए/मो. शकील अख़्तर
ज़िन्दगी क्यों न तुझे बूंद में...
मासूम तमन्ना/मो. शकील अख़्तर
पारसाओं ने बड़े ज़र्फ़ का इज़हार...
मुझे इश्क़ ए ज़लील में/मो. शकील अख़्तर
आहों के सिलसिले मेरे सीने में...
