This entry is part 11 of 22 in the series मई 2023

सहारा गीत काःमयंक श्रीवास्तव

याद की परछाइयों का

साथ देने ले लिए

राह में मिल ही गया

हमको सहारा गीत का।

 

मूक अन्तदृष्टि की

संवेदना का स्वर मिला

कुछ दिनों से बंद फिर से

जुड़ गया है सिलसिला।

यह मधुर सौगात वैसे

तो अचानक मिल गई

मिल रहा किन्तु हमको

स्वाद मीठी जीत का।

 

दूरियां मजबूरियों का

मेल हो पाया नहीं

यह गनीमत है कि ज्यादा

दर्द गहराया नहीं

हो गई नाकाम सारी

नापने की कोशिशें

हैं गहन रिश्ता अतुल

गहराइयों से प्रीत का

 

याद की मीठी छुअन का

सुख पुन: मिलने लगा

क्योंकि मुरझाया हुआ

मन फूल फिर खिलने लगा

छटपटाहट ने कबूला

तार रिश्तों का कभी

टूटना संभव नहीं है

आज और अतीत का

 

मयंक श्रीवास्तव

मई 2023

बदल गया है गाँवःधीरज श्रीवास्तव प्रश्न करने दिन खड़ा थाःसुरजीत मान जलईया सिंह
सहारा गीत काःमयंक श्रीवास्तव