This entry is part 16 of 22 in the series मई 2023

फिरे हम लोग दुनिया कोः किशन तिवारी भोपाल

फिरे हम लोग दुनिया को ही अपना दर्द दिखलाते 

हम अपने आप से बाहर निकल कर क्यूँ नहीं आते

 

जिसे इक रोज़ सबके सामने आना ये निश्चय है

 जाने किस लिए सच बोलने से लोग घबराते 

 

हमारी और उनकी प्यास में है फ़र्क़ बस इतना

हमें  पानी नहीं मिलता लहू वो रोज़ पी जाते

 

समय के साथ चलना है तो आँखें खोल कर रखिए 

हमारे बीच हैं कातिल नज़र हमको नहीं आते

 

कई सदियों का हमको है तजुर्बा जाग भी जाओ

कभी गुज़रे हुए लम्हे नहीं फिर लौट कर आते

 

सभी के हाथ को थामे जब अपनी राह चल देंगे 

जमीं से चाँद  तारों तक हम तिरंगा अपना फहराते 

 

किशन तिवारी 

मई 2023

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फिरे हम लोग दुनिया कोः किशन तिवारी भोपाल