This entry is part 18 of 22 in the series मई 2023

इक कली की तरहः मनमोहन सिंह तन्हा

देखने में तो है आदमी की तरह

 पर महकता है वो इक कली की तरह

 ये अंधेरे उसे अब डराते नहीं

 जगमगाता है वो रोशनी की तरह

 आईने की तरह उसका है साफ दिल

 उसका हर लफ्ज़ है बंदगी की तरह

 मुझसे जब वह मिला मेरा ही हो गया

 लगता ही वो नहीं अजनबी की तरह

प्यार उससे मुझे कुछ हुआ इस कदर

जैसे सांसों में हो ज़िंदगी की तरह

 मुस्कुराए तो जैसे खिलें फूल सब

 धड़कनों में बसा आशिकी की तरह

‘तन्हा’ चेहरा है उसका भरा नूर से

 सच बताऊं तो है आप ही की तरह।

मोहन सिंह तन्हा

मई 2023

कागज़ी पहने हुएः विजय वाजिद बगावत लिखी हैः पूनम सिंह
इक कली की तरहः मनमोहन सिंह तन्हा