परिणति/डॉ. शिप्रा मिश्रा
नदी अपना मार्ग स्वयं बनाती है...
मेरे भीतर का पिता/डॉ. शिप्रा मिश्रा
मेरे भीतर रहता है एक पिता… जब...
अर्घ्य/डॉ. शिप्रा मिश्रा
हे सूर्य! तुम इतने प्रखर, तेजस्वी,तेजपुंज...
लोकतंत्र/डॉ. शिप्रा मिश्रा
बिछ चुकी है बिसात अब फिर नए सिरे...
वानप्रस्थ/डॉ. शिप्रा मिश्रा
चले गए सब चले गए जाने दो चले गए...
आज भी/डॉ. शिप्रा मिश्रा
आज भी.. देखा मैंने उसे पानी में...
बिछिया/डॉ. शिप्रा मिश्रा
उस विवाह में हम भी हुए थे निमंत्रित...
तथागत/डॉ. शिप्रा मिश्रा
सभी पुरुष .. प्रवासी नहीं होते...
