प्रारब्ध/कीर्ति श्रीवास्तव
आज फिर उड़ चली हूँ मैं सपनों...
बिटिया/कीर्ति श्रीवास्तव
बिटिया तेरे आ जाने से महका मेरा...
वो माँ ही थी/कीर्ति श्रीवास्तव
वो माँ ही थी जो मुझे खिलाकर खाती...
तेरी छाया हूँ/कीर्ति श्रीवास्तव
तू धूप तो मैं तेरी छाया हूँ तू...
प्यार की परिभाषा/कीर्ति श्रीवास्तव
उस दिन जब तुमने थामा था हाथ मेरा...
महकती जिन्दगी/कीर्ति श्रीवास्तव
वो हंसी ख्वाब वो महकती जि़न्दगी...
यादें/कीर्ति श्रीवास्तव
कितनी अजीब होती हैं ये यादें...
सरगम/कीर्ति श्रीवास्तव
झरोखे से देखती रिमझिम बारिश...
मन हुआ बावरा/कीर्ति श्रीवास्तव
बारिश की बूंदों से भींगती है...
सावन के झूल/कीर्ति श्रीवास्तव
अमुआ पे लग गए सावन के झूले सखियों...
